भारत में जैविक खेती को लेकर किसानों की रुचि लगातार बढ़ रही है। इसी क्रम में पंचगव्य एक बार फिर चर्चा में है। कृषि वैज्ञानिकों और राज्य कृषि विभागों की ताज़ा सलाह में पंचगव्य को मिट्टी की सेहत सुधारने और रासायनिक इनपुट पर निर्भरता घटाने का एक उपयोगी विकल्प माना जा रहा है। हालांकि, गलत मात्रा या गलत समय पर प्रयोग करने से अपेक्षित लाभ नहीं मिलते। आज ज़रूरत है यह समझने की कि पंचगव्य क्या है, इसे कब, कितनी मात्रा में और किस तरीके से इस्तेमाल करना चाहिए।
यह लेख पंचगव्य के व्यावहारिक उपयोग, सही डोज़ और खेती में इसके वास्तविक फायदे पर केंद्रित है, ताकि किसान इसे अनुभव और सलाह के आधार पर सही निर्णय के साथ अपना सकें।
पंचगव्य क्या है और इसका महत्व क्यों बढ़ा है
पंचगव्य गाय से प्राप्त पाँच प्राकृतिक तत्वों से तैयार एक जैविक घोल है:
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गोबर
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गोमूत्र
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दूध
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दही
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घी
परंपरागत भारतीय खेती में इसका उपयोग मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए किया जाता रहा है। हाल के वर्षों में, जब रासायनिक खादों के दुष्प्रभाव और लागत दोनों बढ़े हैं, तब पंचगव्य जैसे प्राकृतिक इनपुट फिर से प्रासंगिक हुए हैं।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, पंचगव्य में मौजूद सूक्ष्मजीव मिट्टी में जैविक गतिविधि को बढ़ाते हैं, जिससे पौधों को पोषक तत्व बेहतर तरीके से मिलते हैं।
पंचगव्य बनाने का संक्षिप्त और सही तरीका
खुद पंचगव्य तैयार करने वाले किसानों के लिए यह जानना जरूरी है कि इसकी गुणवत्ता सीधे इसके प्रभाव को तय करती है।
मानक अनुपात (लगभग 20 लीटर के लिए):
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ताज़ा गोबर: 5 किलो
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गोमूत्र: 3 लीटर
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दूध: 2 लीटर
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दही: 2 लीटर
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देसी गाय का घी: 1 किलो
तैयारी प्रक्रिया:
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सभी सामग्री को प्लास्टिक या मिट्टी के बर्तन में मिलाएं
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रोज़ सुबह-शाम लकड़ी से घोलें
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7–10 दिन तक छायादार स्थान पर रखें
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बदबू बहुत तेज़ हो तो उपयोग न करें
ध्यान रखें कि धातु के बर्तन का प्रयोग न किया जाए, क्योंकि इससे जैविक क्रिया प्रभावित होती है।
खेती में पंचगव्य की सही मात्रा (डोज़)
सबसे आम गलती है पंचगव्य को अधिक मात्रा में प्रयोग करना। इससे पत्तियों पर जलन या फसल पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
छिड़काव (Foliar Spray):
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3% घोल सबसे सुरक्षित माना जाता है
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यानी 3 लीटर पंचगव्य + 100 लीटर पानी
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15–20 दिन के अंतराल पर छिड़काव
मिट्टी में प्रयोग:
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20–30 लीटर पंचगव्य प्रति एकड़
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सिंचाई के पानी के साथ देना बेहतर
बीज उपचार:
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1 लीटर पंचगव्य + 10 लीटर पानी
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बीज को 20–30 मिनट भिगोकर छाया में सुखाएं
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पहले छोटे क्षेत्र में परीक्षण कर परिणाम देखें।
किस फसल में कैसे उपयोग करें
पंचगव्य का असर फसल और मौसम के अनुसार बदल सकता है।
धान और गेहूं:
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रोपाई के 15 दिन बाद पहला छिड़काव
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कल्ले निकलने के समय दूसरा छिड़काव
सब्ज़ियां (टमाटर, मिर्च, भिंडी):
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फूल आने से पहले छिड़काव
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फल बनने की अवस्था में हल्का स्प्रे
फलदार पौधे:
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नई कोपल निकलने के समय
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फूल आने से पहले एक बार
ध्यान रखें कि तेज धूप या बारिश से ठीक पहले छिड़काव न करें।
पंचगव्य से मिलने वाले वास्तविक फायदे
पंचगव्य कोई चमत्कारी समाधान नहीं है, लेकिन सही तरीके से उपयोग करने पर इसके स्पष्ट लाभ देखे गए हैं:
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मिट्टी की जैविक संरचना में सुधार
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सूक्ष्मजीवों की सक्रियता बढ़ती है
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पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं
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फसल की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है
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रासायनिक खाद पर निर्भरता धीरे-धीरे घटती है
कई राज्यों में किए गए ऑन-फार्म ट्रायल्स में यह पाया गया है कि लगातार उपयोग से फसल की गुणवत्ता में सुधार होता है, भले ही उत्पादन में वृद्धि सीमित हो।
किन बातों में सावधानी ज़रूरी है
पंचगव्य को लेकर कुछ व्यवहारिक सीमाएं भी हैं:
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यह रासायनिक खाद का तत्काल विकल्प नहीं है
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खराब तरीके से बना पंचगव्य नुकसान कर सकता है
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कीट प्रबंधन के लिए इसे अकेले समाधान न मानें
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स्थानीय कृषि अधिकारी की सलाह लेना बेहतर
विशेषज्ञ मानते हैं कि पंचगव्य को एकीकृत पोषक प्रबंधन (INM) के हिस्से के रूप में ही इस्तेमाल करना चाहिए।
निष्कर्ष: संतुलित उपयोग ही सही रास्ता
पंचगव्य पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक खेती के बीच एक व्यावहारिक सेतु है। सही मात्रा, सही समय और सही विधि से प्रयोग करने पर यह मिट्टी और फसल दोनों के लिए सहायक साबित हो सकता है। लेकिन अंधानुकरण या अतिउपयोग से बचना ज़रूरी है।
आज की खेती में पंचगव्य का स्थान सहायक इनपुट का है, न कि किसी त्वरित समाधान का। वैज्ञानिक सलाह, स्थानीय परिस्थितियों और अपने अनुभव के आधार पर इसका संतुलित उपयोग ही टिकाऊ खेती की दिशा में सही कदम माना जाएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. पंचगव्य का छिड़काव कितने दिन के अंतराल पर करना चाहिए?
आमतौर पर 15 से 20 दिन के अंतराल पर पंचगव्य का छिड़काव सुरक्षित और प्रभावी माना जाता है। फसल की अवस्था और मौसम को देखकर अंतराल तय करना बेहतर रहता है।
2. क्या पंचगव्य को सभी फसलों में एक जैसी मात्रा में उपयोग किया जा सकता है?
नहीं। फसल, मिट्टी और जलवायु के अनुसार मात्रा बदल सकती है। सामान्यतः 3 प्रतिशत घोल सुरक्षित होता है, लेकिन फलदार पौधों और कोमल सब्ज़ियों में हल्की मात्रा का प्रयोग करना चाहिए।
3. पंचगव्य के साथ रासायनिक खाद या कीटनाशक मिलाया जा सकता है?
पंचगव्य को रासायनिक कीटनाशकों के साथ मिलाने की सलाह नहीं दी जाती। अगर दोनों का उपयोग करना हो तो अलग-अलग समय पर करें, ताकि जैविक गुण प्रभावित न हों।
4. पंचगव्य का असर खेत में कब से दिखना शुरू होता है?
पंचगव्य का प्रभाव धीरे-धीरे दिखता है। आमतौर पर 2–3 सप्ताह में पौधों की बढ़वार और पत्तियों की सेहत में सुधार नज़र आने लगता है।
5. क्या बाजार से खरीदा गया पंचगव्य सुरक्षित होता है?
अगर उत्पाद विश्वसनीय स्रोत से और सही तरीके से तैयार किया गया हो तो उपयोग किया जा सकता है। फिर भी पहली बार प्रयोग से पहले छोटे क्षेत्र में परीक्षण करना समझदारी होती है।

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