जानिए गेहूँ की उन्नत किस्में और उनकी खासियत। कौन-सी किस्म ज्यादा उत्पादन देती है, कौन-सी रोग सहनशील है और अपने क्षेत्र के लिए सही बीज कैसे चुनें – पूरी जानकारी सरल भाषा में।
गेहूँ की उन्नत किस्में और उनकी खासियत
गेहूँ भारत की सबसे महत्वपूर्ण फसलों में से एक है। देश के करोड़ों लोगों का भोजन इससे जुड़ा है और लाखों किसानों की आमदनी भी इसी पर निर्भर करती है। ऐसे में सही किस्म का चुनाव करना बहुत जरूरी हो जाता है। आज बाजार में कई गेहूँ की उन्नत किस्में उपलब्ध हैं, जो अच्छी पैदावार, रोग प्रतिरोधक क्षमता और बेहतर दाने की गुणवत्ता देती हैं।
इस लेख में हम सरल भाषा में जानेंगे कि गेहूँ की उन्नत किस्में कौन-सी हैं, उनकी खासियत क्या है और किसान भाई अपनी जमीन व मौसम के हिसाब से सही किस्म कैसे चुन सकते हैं।
गेहूँ की उन्नत किस्में क्यों जरूरी हैं?
पहले किसान पारंपरिक बीजों का उपयोग करते थे। उन किस्मों से पैदावार सीमित होती थी और रोग लगने का खतरा भी ज्यादा रहता था। अब कृषि वैज्ञानिकों ने ऐसी उन्नत गेहूँ की किस्में विकसित की हैं जो:
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ज्यादा उत्पादन देती हैं
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कम समय में पक जाती हैं
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रोगों के प्रति सहनशील होती हैं
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बदलते मौसम में भी अच्छा प्रदर्शन करती हैं
अगर किसान सही किस्म का चयन करें तो प्रति एकड़ उत्पादन में स्पष्ट बढ़ोतरी देखी जा सकती है।
गेहूँ की उन्नत किस्में और उनकी खासियत
नीचे कुछ प्रमुख गेहूँ की उन्नत किस्में और उनकी विशेषताएँ दी जा रही हैं, जिन्हें अलग-अलग राज्यों में सफल माना जाता है।
HD 2967 गेहूँ की किस्म
यह किस्म उत्तर भारत में काफी लोकप्रिय है।
खासियत:
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अच्छी पैदावार क्षमता
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दाने का आकार मध्यम और वजन अच्छा
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पीला रतुआ और भूरा रतुआ रोग के प्रति सहनशील
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सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त
यह किस्म सामान्य बोआई के लिए सही मानी जाती है। जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा है, उनके लिए यह एक भरोसेमंद विकल्प है।
PBW 343 गेहूँ की किस्म
यह किस्म पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में काफी समय से बोई जा रही है।
खासियत:
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समय पर बोआई के लिए उपयुक्त
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अच्छी गुणवत्ता का दाना
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बाजार में मांग स्थिर
हालांकि कुछ क्षेत्रों में रोग की समस्या बढ़ी है, इसलिए स्थानीय कृषि विभाग से सलाह लेकर ही इसका चयन करना बेहतर रहता है।
HD 3086 गेहूँ की किस्म
यह किस्म भी उत्तर भारत में तेजी से अपनाई गई है।
खासियत:
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प्रति हेक्टेयर अच्छी पैदावार
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मजबूत तना, गिरने की समस्या कम
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रोगों के प्रति बेहतर सहनशीलता
यह किस्म उन किसानों के लिए ठीक है जो अधिक उत्पादन पर ध्यान देना चाहते हैं।
लोक-1 गेहूँ की किस्म
मध्य प्रदेश और राजस्थान में यह किस्म लोकप्रिय है।
खासियत:
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कम पानी में भी ठीक उत्पादन
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सूखा सहनशील
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चपाती के लिए अच्छा आटा
जहाँ पानी की कमी रहती है, वहाँ यह किस्म किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।
DBW 187 गेहूँ की किस्म
नई गेहूँ की उन्नत किस्में में से एक मानी जाती है।
खासियत:
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उच्च उत्पादन क्षमता
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पीला और भूरा रतुआ के प्रति सहनशील
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उत्तरी मैदानी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त
जो किसान नई किस्में अपनाना चाहते हैं, वे अपने क्षेत्र के कृषि विज्ञान केंद्र से जानकारी लेकर इसे आजमा सकते हैं।
उन्नत गेहूँ की किस्म चुनते समय किन बातों का ध्यान रखें?
केवल नाम सुनकर बीज खरीद लेना सही तरीका नहीं है। किस्म चुनते समय कुछ बातों पर ध्यान देना जरूरी है:
1. जलवायु और क्षेत्र
हर किस्म हर जगह अच्छा प्रदर्शन नहीं करती। अपने जिले या राज्य के लिए सिफारिश की गई गेहूँ की उन्नत किस्में ही चुनें।
2. सिंचाई की उपलब्धता
अगर खेत में नियमित पानी की सुविधा है तो सिंचित किस्में चुनें। बारिश पर निर्भर खेती में सूखा सहनशील किस्में बेहतर रहती हैं।
3. बोआई का समय
समय पर बोआई और देरी से बोआई के लिए अलग-अलग किस्में होती हैं। गलत समय पर बोई गई किस्म से उत्पादन कम हो सकता है।
4. रोग प्रतिरोधक क्षमता
रतुआ जैसे रोग गेहूँ की फसल को काफी नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए ऐसी उन्नत गेहूँ की किस्में चुनें जिनमें रोग सहनशीलता हो।
गेहूँ की उन्नत किस्में और उत्पादन पर असर
अगर किसान सही तकनीक के साथ उन्नत बीजों का उपयोग करें तो उत्पादन में साफ फर्क दिखता है। उन्नत किस्मों के साथ:
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संतुलित खाद का उपयोग
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समय पर सिंचाई
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खरपतवार नियंत्रण
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रोग व कीट प्रबंधन
इन सभी बातों का पालन करने से प्रति एकड़ उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। कई किसानों ने पारंपरिक बीज से उन्नत बीज पर आने के बाद उत्पादन में 15 से 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी है।
प्रमाणित बीज कहाँ से खरीदें?
हमेशा कोशिश करें कि बीज:
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कृषि विभाग द्वारा प्रमाणित हो
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कृषि विज्ञान केंद्र या अधिकृत बीज विक्रेता से लिया जाए
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पैकेट पर अंकुरण प्रतिशत और उत्पादन वर्ष लिखा हो
बाजार से सस्ता लेकिन बिना लेबल वाला बीज खरीदना जोखिम भरा हो सकता है।
भविष्य में गेहूँ की उन्नत किस्में
कृषि अनुसंधान संस्थान लगातार नई गेहूँ की उन्नत किस्में विकसित कर रहे हैं। बदलते मौसम, तापमान में बढ़ोतरी और नई बीमारियों को ध्यान में रखकर बीज तैयार किए जा रहे हैं। आने वाले समय में ऐसी किस्में ज्यादा देखने को मिलेंगी जो कम पानी में भी अच्छा उत्पादन दें और गर्मी सहन कर सकें।
किसानों को चाहिए कि वे समय-समय पर कृषि मेले, प्रशिक्षण कार्यक्रम और कृषि विज्ञान केंद्र से जुड़कर नई जानकारी लेते रहें।
निष्कर्ष
गेहूँ की उन्नत किस्में और उनकी खासियत समझना हर किसान के लिए जरूरी है। सही किस्म का चुनाव सीधे उत्पादन और आमदनी पर असर डालता है। अपने क्षेत्र, मौसम और संसाधनों के अनुसार किस्म चुनें और वैज्ञानिक तरीकों से खेती करें। छोटे बदलाव भी लंबे समय में बड़ा फर्क ला सकते हैं।

